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पाकिस्तान में हर 16 में से एक इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला बच्चा यौन शोषण का शिकार, स्टडी में खुलासा

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Oct 14, 2026 01:22 pm IST,  Updated : Oct 14, 2026 01:43 pm IST

पाकिस्तान में बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण को लेकर एक चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है। एक साल के दौरान देश में करीब 15 लाख बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण के शिकार हुए। हर 16 में से एक इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला बच्चा यौन शोषण का शिकार होता है।

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ऑनलाइन यौन शोषण के बढ़ते खतरे Image Source : INDIA TV

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करीब 1.5 मिलियन बच्चों ने एक साल में ऑनलाइन यौन शोषण या अब्यूज़ झेला है। एक स्टडी में यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। यूनिसेफ, ECPAT इंटरनेशनल और इंटरपोल की ओर से संयुक्त रूप से यह स्टडी की गई है। स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में 85 प्रतिशत घटनाओं में आरोपी कोई अनजान व्यक्ति नहीं बल्कि पीड़ित बच्चे का परिचित था।

पाकिस्तान के डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक इस स्टडी में 12 से 17 वर्ष की उम्र के इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले बच्चों पर फोकस किया गया। स्टडी के मुताबिक इस आयु वर्ग में लगभग हर 16 में से एक बच्चा एक साल के दौरान तकनीक के माध्यम से होने वाले यौन शोषण या उत्पीड़न का शिकार हुआ।

सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा मामले

इस स्टडी में सोशल मीडिया को ऑनलाइन यौन शोषण की सबसे आम जगह बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की ओर से बताई गई शोषण की घटनाओं में 44 प्रतिशत मामले सोशल मीडिया से जुड़े थे। ऑनलाइन शोषण में बच्चों को अनचाही यौन तस्वीरें या संदेश भेजना, अंतरंग तस्वीरों की मांग करना, उनकी तस्वीरें बिना सहमति साझा करना और यौन धमकी देकर ब्लैकमेल करना शामिल है।

डर और बदनामी के कारण शिकायत नहीं करते बच्चे

स्टडी में कहा गया है कि डर, सामाजिक बदनामी और परिवार की संभावित प्रतिक्रिया के कारण कई बच्चे अपने साथ हुई घटनाओं के बारे में किसी को नहीं बताते। पीड़ितों को इस बात का डर रहता है कि परिवार उन्हें ही दोषी ठहराएगा, अपमानित करेगा या फिर उनकी गतिविधियों पर पाबंदियां लगा देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन यौन शोषण का सामना करने वाले आधे से अधिक बच्चों ने अपने अनुभव के बारे में किसी को नहीं बताया। सर्वे में शामिल किसी भी बच्चे ने हेल्पलाइन, सामाजिक कार्यकर्ताओं या पुलिस जैसे औपचारिक माध्यमों से शिकायत दर्ज कराने की बात नहीं कही। स्टडी में यह भी रेखांकित किया गया कि लड़कों के साथ होने वाले यौन शोषण के मामले सामाजिक धारणाओं और इस विषय पर खुलकर बात करने में झिझक के कारण नजरअंदाज हो सकते हैं।

एआई से बच्चों के लिए बढ़ रहे नए खतरे

इस बीच बच्चों के खिलाफ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि नजात माला म'जिद ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करते हुए सरकारों से बच्चों की सुरक्षा मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संघर्षों, प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु संकट के कारण करीब 4.5 करोड़ बच्चे विस्थापित हैं। म'जिद ने चेतावनी दी कि तकनीक में तेजी से हो रहे विकास के साथ बच्चों के लिए नए खतरे भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने बच्चों के यौन शोषण, साइबर बुलिंग, डीपफेक और बच्चों को आपराधिक गतिविधियों में शामिल करने जैसे जोखिमों को बढ़ाने के नए रास्ते खोले हैं।

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